sad gareebi shayari in hindi, sad gareebi shayari, saD Shayari for poor, sad life shayari , bhookh shayari भूख बहुत बड़ी चीज़ है ऊपर वाल...
sad gareebi shayari in hindi, sad gareebi shayari, saD Shayari for poor, sad life shayari , bhookh shayari
भूख बहुत बड़ी चीज़ है
ऊपर वाला कभी किसी को दो रोटी मोहताज़ ना करे
मेरी दुआ है उस रब से के वो सब को इज़्ज़त की रोटी दे !!

गरीबों की ये बस्ती है कहाँ से खुशियां लाऊं !!
यहाँ बच्चे तो +रहते है मगर बचपना नही रहता !!
हाल ऐ ज़िन्दगी ना पूछों कभी किसी गरीब से
इंसानो से उसे गिला नही उसे गीला है अपने नसीब से !
रात के पिछले पहर इक आवाज़ सी आती रही मुझे
कोई रो रोकर पूछ रहा था अपने मुजीब से
मिटटी के मकान को पानी से बचाता रहा उम्र भर
उदास दर वो दीवार पर शक्लें भी उतरी थी अज़ीब सी
मतलब परस्ती की दुनिया में कौन दोस्त कौन दुश्मन
हम सबसे ज्यादा डरते है आज अपने हबीब से
घर पर चाहे दो निवाले भी ना हो खाने के लिए
मेहमान नवाज़ी में चाय लाती बड़ी तहज़ीब से
ज़िन्दगी अपनी कितनी परेशान है खबर तब हुई
कोई मर रहा था और हम दवा सके तबीब से
ज़िन्दगी में गरीबी से बड़ी कोई सज़ा नही
गरीबी मार देती है चाहे हम बच जाए अपने रक़ीब से !!
भूख बहुत बड़ी चीज़ है
ऊपर वाला कभी किसी को दो रोटी मोहताज़ ना करे
मेरी दुआ है उस रब से के वो सब को इज़्ज़त की रोटी दे !!

गरीबों की ये बस्ती है कहाँ से खुशियां लाऊं !!
यहाँ बच्चे तो +रहते है मगर बचपना नही रहता !!
हाल ऐ ज़िन्दगी ना पूछों कभी किसी गरीब से
इंसानो से उसे गिला नही उसे गीला है अपने नसीब से !
रात के पिछले पहर इक आवाज़ सी आती रही मुझे
कोई रो रोकर पूछ रहा था अपने मुजीब से
मिटटी के मकान को पानी से बचाता रहा उम्र भर
उदास दर वो दीवार पर शक्लें भी उतरी थी अज़ीब सी
मतलब परस्ती की दुनिया में कौन दोस्त कौन दुश्मन
हम सबसे ज्यादा डरते है आज अपने हबीब से
घर पर चाहे दो निवाले भी ना हो खाने के लिए
मेहमान नवाज़ी में चाय लाती बड़ी तहज़ीब से
ज़िन्दगी अपनी कितनी परेशान है खबर तब हुई
कोई मर रहा था और हम दवा सके तबीब से
ज़िन्दगी में गरीबी से बड़ी कोई सज़ा नही
गरीबी मार देती है चाहे हम बच जाए अपने रक़ीब से !!